IRFC Share Price में 25 फरवरी के ट्रेडिंग सेशन के दौरान करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई और स्टॉक 104.65 रुपये के स्तर पर बंद हुआ। यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब सरकार ने Indian Railway Finance Corporation (IRFC) में OFS के जरिए अपनी हिस्सेदारी बेचने की घोषणा की है। बाजार में इस खबर का असर तुरंत देखने को मिला और शेयर पर शॉर्ट टर्म दबाव बन गया।
सरकारी रेलवे पीएसयू होने के कारण IRFC हमेशा निवेशकों के रडार पर रहता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह गिरावट सिर्फ अस्थायी है या निवेशकों को सतर्क हो जाना चाहिए?
IRFC Share Price
सरकार ने IRFC में 4% हिस्सेदारी बेचने का ऐलान किया है। OFS के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले अधिकतम 26.13 करोड़ इक्विटी शेयर ऑफर किए जा रहे हैं, जो कंपनी की कुल चुकता पूंजी का 2% है। फ्लोर प्राइस 104 रुपये प्रति शेयर तय की गई है, जो पिछले क्लोजिंग प्राइस से लगभग 5% कम है।
आमतौर पर जब किसी कंपनी में OFS डिस्काउंट पर लाया जाता है, तो बाजार में शॉर्ट टर्म प्राइस एडजस्टमेंट देखने को मिलता है। निवेशक डायल्यूशन और आर्बिट्राज के अवसर को ध्यान में रखते हुए बिकवाली कर सकते हैं। यही कारण रहा कि IRFC Share Price में इंट्राडे और क्लोजिंग दोनों स्तर पर गिरावट दर्ज हुई।
क्या मजबूत हैं IRFC के फंडामेंटल्स?
लॉन्ग टर्म नजरिए से देखें तो IRFC का बिजनेस मॉडल काफी स्थिर माना जाता है। यह कंपनी भारतीय रेलवे और उससे जुड़े प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करती है। रेलवे सेक्टर में सरकार आने वाले वर्षों में भारी कैपेक्स की योजना बना रही है, जिसका सीधा फायदा IRFC को मिल सकता है।
कंपनी ने हाल के वर्षों में अपने मॉडल को ‘IRFC 2.0’ के रूप में री-इन्वेंट किया है। अब यह केवल भारतीय रेलवे तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे इकोसिस्टम से जुड़े पावर जेनकोस, पोर्ट्स, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक पार्क और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे प्रोजेक्ट्स को भी फाइनेंस कर रही है। भविष्य में मेट्रो और रैपिड रेल प्रोजेक्ट्स में भी विस्तार की तैयारी है।
AUM और ग्रोथ गाइडेंस क्या कहती है?
वित्त वर्ष की शुरुआत में कंपनी का AUM करीब ₹4.46 लाख करोड़ था, जो तीसरी तिमाही तक बढ़कर ₹4.75 लाख करोड़ हो चुका है। मैनेजमेंट को भरोसा है कि कंपनी जल्द ही ₹5 लाख करोड़ AUM का आंकड़ा पार कर सकती है।
वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी ने ₹60,000 करोड़ एसेट सैंक्शन और ₹30,000 करोड़ डिस्बर्समेंट का लक्ष्य रखा था, जिसे तीसरी तिमाही तक लगभग हासिल कर लिया गया है। यह संकेत देता है कि ग्रोथ ट्रैक पर बनी हुई है।
एक्सपर्ट की राय: क्या करें निवेशक?
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि IRFC Share Price में आई गिरावट मुख्य रूप से OFS के कारण है और यह शॉर्ट टर्म प्रेशर हो सकता है। कंपनी के फंडामेंटल्स मजबूत हैं और रेलवे सेक्टर की दीर्घकालिक ग्रोथ कहानी अब भी बरकरार है।
नए लॉन्ग टर्म निवेशक मौजूदा स्तरों के आसपास चरणबद्ध तरीके से एंट्री पर विचार कर सकते हैं। वहीं, जिन निवेशकों के पास पहले से शेयर है, उन्हें होल्ड की रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
निष्कर्ष
IRFC Share Price में हालिया गिरावट ने बाजार में हलचल जरूर पैदा की है, लेकिन कंपनी की दीर्घकालिक संभावनाएं अब भी मजबूत दिखती हैं। रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर और फाइनेंसिंग की बढ़ती जरूरतों के बीच IRFC एक अहम भूमिका निभा रही है। ऐसे में शॉर्ट टर्म वोलैटिलिटी के बावजूद लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह स्टॉक नजरअंदाज करने लायक नहीं है।



